
पेड़ों की कटाई (प्रतीकात्मक तस्वीर)
हैदराबाद के कांचा गाचीबोवली जंगल में पेड़ों की कटाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने तेलंगाना के अधिकारियों को जेल भेजने की चेतावनी दी। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि अगर आप चाहते हैं कि मुख्य सचिव और आधा दर्जन अधिकारी अस्थाई जेल में चले जाएं तो हम ऐसा कर सकते हैं। उन्होंने कहा “हम हमेशा से सतत विकास के पक्षधर रहे हैं।”
तेलंगाना सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई टालने की मांग की और गर्मी की छुट्टी के बाद की तारीख मांगी। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम आपको सतर्क कर रहे हैं। आप ऐसी बात का बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं। लंबे वीकेंड का फायदा उठाकर आप ये सब कर रहे हैं।
कोर्ट ने कहा- सब योजनाबद्ध लग रहा है
तेलंगाना सरकार का पक्ष रख रहे वकील से कोर्ट ने कहा कि सिंघवी क्या आपने वो तस्वीरें देखी हैं? दर्जनों बुलडोजर मंगवाए गए थे। प्रथम दृष्टया ये सब पहले से ही योजनाबद्ध है। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मामले में यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया था।
अदालत ने दिए थे जांच के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार के वन्यजीव वार्डन को यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने 100 एकड़ में वनों की कटाई के कारण हुए नुकसान से वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए आवश्यक जांच करने के निर्देश दिए थे।
पेड़ों की कटाई पर हाई कोर्ट ने लगाई थी रोक
हैदराबाद उच्चतम न्यायालय ने 16 अप्रैल को हैदराबाद विश्वविद्यालय के निकट की भूमि पर बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई के कारण हो रहे पर्यावरणीय नुकसान पर चिंता जताई थी और कहा कि वह पर्यावरण और पारिस्थितिकी की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगा। न्यायमूर्ति बी.आर.गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने वहां पेड़ों की कटाई में ‘‘जल्दबाजी’’ को लेकर तेलंगाना सरकार से सवाल किया था। पीठ ने तेलंगाना की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी से कहा, ‘‘आपको एक योजना बनानी होगी कि आप उन 100 एकड़ (भूमि) की पूर्व की स्थिति को कैसे बहाल करेंगे।’’ न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि शीर्ष अदालत उन वीडियो को देखकर हैरान है, जिनमें पशु आश्रय की तलाश में इधर उधर भागते दिख रहे हैं। पीठ ने तेलंगाना के वन्यजीव वार्डन को वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति गवई ने कहा, ‘‘पर्यावरण और पारिस्थितिकी की सुरक्षा के लिए हम हरसंभव प्रयास करेंगे।’’ पीठ ने मौखिक रूप से कहा था, ‘‘ सुनवाई के दौरान, वहां एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा।’’ शीर्ष अदालत ने तीन अप्रैल को कांचा गाचीबोवली वन क्षेत्र में राज्य के पेड़ कटाई अभियान का स्वत: संज्ञान लिया और इसे ‘‘बहुत गंभीर’’ मामला बताया। पीठ ने तेलंगाना सरकार से बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की ‘‘अनिवार्यता’’ के बारे में पूछा और अगले आदेश तक भविष्य में ऐसी किसी भी तरह की गतिविधि पर रोक लगा दी। हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने विश्वविद्यालय की सीमा से लगी 400 एकड़ भूमि को विकसित करने की राज्य सरकार की योजना के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
Author: Deep chandra Joshi
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